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Although each day is celebrated here with great grand frolic and zeal, the year begins with the massive Shiv Bhandar

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ॐ नमः शिवाय की सेवा से लोगों को क्या मिलता है कुछ

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ॐ नमः शिवाय आश्रम में सभी प्रकार के कष्टों का निवारण “ॐ नमः शिवाय महामंत्र” के जप और परम पूज्य गुरूजी की सेवा से होता है । अगर आप भी किसी बीमारी या परेसानी से परेशान है तो ॐ नमः शिवाय जरूर आएं, अधिक जानकारी के लिए youtube.com/onslko or onslko.org – पर देखें …

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परमपूज्य गुरुदेव भगवान का जीवन परिचय

हमारे गुरुदेव भगवान का जन्म ढोकरी स्टेट कोटवा कोर्ट राजपरिवार में 10 अगस्त 1958 को हुआ था. हमारे गुरुदेव भगवान के पिता श्री लाल महेन्द्रप्रताप सिंह उर्फ़ लाल साहब व माता का नाम लाल मोती देवी है ।

पिता बचपन में ही स्वर्ग सिधार गये । माता श्री की छत्र छाया आज भी बनी हुई है. हमारे गुरुदेव भगवान के बाबा का नाम राजा शिवपाल सिंह था जो विश्व प्रसिद्ध थे जिन्होंने बबूल का पेड़ उखाड़ कर फेक दिया था, उन्ही के पनत हमारे गुरुदेव भगवान है. जैसा कि मुझे ज्ञात है हमारे गुरुदेव भगवान बचपन से ही गरीबों की मदद करते थे, उनके मुखारबिन्दु से सुना हूँ स्कूल जाते समय उनको जेब खर्च मिलता था उस जेब खर्च को बचाते हुए एल्युमीनियम का कलछुल , भगोना और पलटा तथा मिटटी के तेल से चलने वाला स्टोव खरीदा ।

घर से चावल दाल लेकर कभी खिचड़ी बनाते कभी तहरी बनाते थे । उनके साथ जितने गरीब बच्चे स्कूल पढ़ने जाते थे सबको खिचड़ी या तेहरी खिलाते थे । गरीब बच्चों के लिए जाड़े का स्वेटर और वस्त्र की व्यवस्था भी करते थे । बचपन से ही गरीब बच्चों के प्रति उनका लगाव था। पढाई के साथ -2 हर समय समाज सेवा में लगे रहते थे। उसी दरम्यान एक्यूप्रेशर की पढ़ायी भी करने लगे। जब एक्यूप्रेशर का ज्ञान प्राप्त हो गया तो घर में जब बच्चे बीमार होते थे तो एक्यूप्रेशर से उनका इलाज कर देते थे, बच्चे ठीक हो जाते थे धीरे-2 इन बातों को नाते-रिश्तेदार भी जानने लगे । जब कोई भी नाते-रिश्तेदार बीमार होता तो वह भी आने लगा और गुरुदेव- भगवान से एक्यूप्रेशर से इलाज करवाकर ठीक होने लगा। इसका देखा- देखी बड़े-2 जज व अधिकारी भी आने लगे और अपना इलाज करवाकर सब ठीक होने लगे..

इसी दरम्यान गुरुदेव भगवान के साथ चमत्कार हुआ । बाबा इलाहाबाद आश्रम में बैठे थे, बनारस से एक व्यक्ति आये वो कहने लगे कि बाबा हमारे घर चलिए मेरे बाग में बहुत सुन्दर- स्वादिष्ट लँगड़े आम का पेड़ है, आप चलकर मेरे साथ उस लँगड़े आम का सेवन करें । हमारे गुरुदेव भगवान लँगड़े आम के बहुत बड़े शौकीन है, हमारे गुरुदेव भगवान उस व्यक्ति के साथ बनारस चले गये । और बाग में बैठकर आम खाना शुरू करने वाले ही थे कि तभी 10 -20 लोगों का झुण्ड आ गया उन लोगों को मालूम था कि गुरुदेव भगवान को एक्यूप्रेशर की विधा मालूम है उस विधा के माध्यम से हमारा इलाज कर देंगे और हम ठीक हो जायेंगे ।

गुरुदेव भगवान से बार-2 सभी लोग आग्रह करने लगे । गुरुदेव भगवान उनकी बातों को सुनकर एक्यूप्रेशर विधि से उनका इलाज कर दिये सब लोग इलाज कराने बाद चले गये । जैसे ही गुरुदेव भगवान आम खाने की तैयारी किये ठीक उसी समय एक बूढ़ा व्यक्ति एक 8 वर्ष के बच्चे को लेकर आ गया, बूढ़ा व्यक्ति गुरुदेव भगवान से कहने लगा मेरा बच्चा गूँगा है, गुरुदेव भगवान इसका इलाज कर दीजिये ये भी बोलने लगे । मेरे गुरुदेव भगवान ने कहा, हे बाबा आप जाओ, मैं एक्यूप्रेशर पद्धति से इलाज करता हूँ और एक्यूप्रेशर से गूँगा नहीं बोलता । वह बूढ़ा बाबा गुरुदेव भगवान से बार-2 आग्रह करने लगा कि हमारे बच्चे को छू दीजिये । गुरुदेव भगवान बोलें हमारे छूने से बच्चा नहीं ठीक होगा।गुरुदेव भगवान को आम खाने में देरी हो रही थी तो गुरुदेव भगवान उसको हटाने के लिए कहे कि तुम 40 बार इलाहाबाद आओ हो सकता है तेरा गूँगा बालक बोल जाये । बूढ़ा बाबा कहा कि मैं 40 बार नहीं 400 बार आऊंगा गुरुदेव भगवान, मेरा बच्चा बोल जाए । गुरुदेव भगवान बेमन से एक्यूप्रेशर विधि से उसका इलाज कर दिये । बूढ़े बाबा गूँगे बच्चे को लेकर कुछ दूर चले गये 15 मिनट बाद बूढ़े बाबा दौड़ते हुए आये व कहने लगे गुरुदेव भगवान-2 हमारा बच्चा बोलने लगा । गुरुदेव भगवान को विश्वास नहीं हुआ उस बूढ़े बाबा के ऊपर हमारे गुरुदेव भगवान नाराज हो गये क्योंकि वह आम खाने में बाधा डाल रहा था ।

हमारे गुरुदेव भगवान बोले तेरा दिमाग खराब हो गया है कहीं मेरे छूने से गूँगा बोलता है । वह बूढ़ा बोला नहीं गुरुदेव भगवान मेरा बच्चा बोल रहा है और वह बूढ़ा अपने बच्चे का हाथ घसीटता हुआ ले आया वह बच्चा अपने पापा से कहने लगा बाबू चला घरे जैसे ही हमारे गुरुदेव भगवान उसके मुख से वाणी सुने आश्चर्य चकित रह गये ।

हमारे गुरुदेव भगवान उस बालक से पूछे बेटा तुम्हारा नाम क्या है ? तो वह बालक बोला क्या तुम मेरा नाम नहीं जानते ।

मेरे गुरुदेव भगवान कहे नहीं बेटा मैं तेरा नाम नहीं जानता । तुम अपना नाम बताओ वो बालक हँसने लगा और कहा ‘ मेरा नाम भोलेनाथ ’ है । हमारे गुरुदेव भगवान आँखे बन्द कर लिए और रोने लगे जैसे ही आँसू की धारा बही साक्षात् भोलेनाथ का दर्शन प्राप्त किया । वहीँ से गरीबों की सेवा प्रारम्भ की । यह घटना 33 वर्ष पूर्व जून- 1983 की है ।

इसके अतिरिक्त हमारे गुरुदेव भगवान का बचपन भी अचरज भरा था जैसा कि माता जी के मालूम हुआ कि गाँव में एक सांड था जो कि लोगों को मार-2 कर जीवन समाप्त कर देता था । एकबार गाँव के एक बूढ़े व्यक्ति को खदेड़ लिया हमारे गुरुदेव भगवान उस समय 5 वर्ष के थे वो सांड के आगे जाकर लेट गये, सांड वही पर रुक गया और बूढ़े बाबा की जान बच गयी । इसके अलावा बचपन में ही हमारे गुरुदेव भगवान एक कोबरा साँप को पकडकर लपेट लिए सारे लोग रोने-चिल्लाने लगे । हमारे गुरुदेव भगवान को साँप ने कुछ नहीं किया उन्होंने उसको छोड़ दिया और वह चला गया ।

आज 33 वर्ष से हमारे गुरुदेव भगवान उसी एक्यूप्रेशर पद्धति से इलाज करते है लेकिन उसी एक्यूप्रेशर में भोलेनाथ की शक्तियाँ हैं । हमारे गुरुदेव भगवान के कोई गुरु नहीं हैं, हमारे गुरुदेव भगवान भोलेनाथ को ही अपना गुरु मानते हैं और उन्हीं का स्मरण करके एक्यूप्रेशर विधि से लोगों का इलाज करते हैं इससे चमत्कारिक रूप से लोगों को फायदा हो रहा है । हमारे गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद से हजारों लोगों को बच्चे हो गये । असाध्य से असाध्य कष्ट दूर हो गये मैं ऐसे गुरुदेव भगवान को कोटि-2 सहस्त्र कोटि नमन करता हूँ ।
गुरुवाणी
परमात्मा ही जन्म देता है, परमात्मा ही मृत्यु देता है ।
परमात्मा ही कष्ट देता है, परमात्मा ही कष्ट का हरण करता है । 

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गुरुदेव भगवान का उददेश्य – 

हमारे गुरुदेव भगवान के निम्न उददेश्य हैं हमारे गुरुदेव भगवान प्रवचन नहीं देते, हमारे गुरुदेव भगवान पहले स्वयं करते है उसके बाद उसी कार्य को दूसरे को करने के लिए प्रेरित करते है हमारे गुरुदेव भगवान का प्रथम उददेश्य है:-

  • गरीबों को भरपेट भोजन कराना । हमारे गुरुदेव भगवान प्रत्येक दिन हजारों भक्तों को भोजन कराते है, शनिवार, रविवार, मंगलवार, ब्रहस्पतिवार को महाप्रसाद 10 हजार लोगों को कराते है ।
  • हमारे गुरुदेव भगवान कोई भी नशा नहीं करते हमारे गुरुदेव भगवान का केवल एक ही नशा है उस नशा का नाम है – ‘ ॐ नमः शिवाय ‘ ये नशा जल्दी चढ़ता नहीं और जब चढ़ जाता है तो जल्दी उतरता नहीं । इसलिए हमारे गुरुदेव भगवान सभी नशा छोड़कर ॐ नमः शिवाय रूपी नशा ग्रहण करने को कहते है ।
  • हमारे गुरुदेव भगवान आश्रम में गरीब बालिकाओं का पालन – पोषण व पढाई कराते हैं तथा बड़ी हो जाने पर उनका विवाह करते हैं ।
  • गरीब तथा वृद्ध जनो की सेवा हमारे गुरुदेव भगवान का चतुर्थ लक्ष्य है ।
  • जीर्ण – शीर्ण मन्दिरों का जीर्णोद्धार हमारे गुरुदेव भगवान करते हैं ।

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गुरुदेव भगवान के कार्य – 

 

  • हमारे गुरुदेव भगवान प्रत्येक शनिवार, रविवार जयपाल खेड़ा गोमती नगर ‘ॐ नमः शिवाय ‘ आश्रम लखनऊ में गरीब असहायों की सेवा करते है, उनके नाना प्रकार के कष्ट व दुखों को दूर करते हैं।
  • प्रत्येक मंगलवार को कानपुर में रामादेवी चौराहे से सनिगवॉ रोड, काशीराम आवास योजना के बगल में ‘ ॐ नमः शिवाय ‘ आश्रम में प्रत्येक मंगलवार देखने में एक्यूप्रेशर पद्धति लेकिन कृपा भोलेनाथ के माध्यम से नाना प्रकार की बीमारी व कष्ट को दूर करते हैं।
  • प्रत्येक बृहस्पतिवार को इलाहाबाद गऊघाट ई.सी.सी. कॉलेज के पीछे एक्यूप्रेशर पद्धति के माध्यम से जो देखने में लगता है लेकिन कृपा भोलेनाथ की होती है, जिससे नाना प्रकार की बीमारी व कष्ट को दूर करते है।

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गुरुदेव भगवान का सबसे बडा कार्य

 

कुम्भ मेला व माघ मेले में विशाल भण्डारे का आयोजन करना ।

हमारे गुरुदेव भगवान की वाणी हे:-

  • न कोई भूखा जाने पाये
    न कोई भूखा सोने पाये
    न कोई भूखा रोने पाये

मनुष्य के लिए सबसे बडा दान अन्न दान होता है क्योंकि इससे जीवन की रक्षा होती है। हमारे गुरुदेव भगवान अपने भक्तों से साल भर मूठी-2 चावल, तेल, नमक, हल्दी, एकत्रित करवाते हैं । जब भण्डारा प्रारम्भ होने में 2 माह रह जाता है तो कड़वा तेल, रिफ़ाइन्ड बेसन ये भक्तों से माँगते हैं तथा आर्थिक सहयोग भी लेते हैं ।

सभी भक्त खुशी -2 अपनी क्षमतानुसार सहयोग करते हैं । ये भण्डारा जनवरी माह में प्रारम्भ होकर फरवरी माह में सम्पन्न होता है । प्रत्येक दिन लाखों लोग प्रातः 6 बजे से लेकर के रात्रि के 2 बजे तक प्रसाद ग्रहण करते हैं । यह भण्डारा संगम मार्ग सेक्टर -2 में बनता है इस भण्डारे को बनाने के लिए बड़े-2 कराहे व बड़े-2 भगोनों का प्रयोग किया जाता है ।

सुबह के समय कढी-भात और 12 बजे से सारी रात पूड़ी-सब्जी व चावल का वितरण किया जाता है ।

इस कार्य को करने के लिए हमारे गुरुदेव भगवान के सैकड़ो सेवादार दिन-रात रुक कर मदद करते है । खाना खिलाने में स्वच्छता रहे, तीर्थ यात्रियों को पत्तल में खाना न देकर थाली में खाना खिलाया जाता है । वह थाली सेवागारों द्वारा माँजी जाती है, जो भी तीर्थयात्री साधू-महात्मा गरीब लोग आते हैं उनको सर्वप्रथम आदर सहित बैठाकर चरण पखारा जाता है, आरती उतारी जाती है फिर उनको भण्डारे का प्रसाद दिया जाता है क्योंकि हमारे गुरुदेव भगवान कहते हैं कि अतिथि भगवान होते हैं जो हमारे यहाँ आ रहे हैं उनको भगवान के रूप में ही देखो ।

ये भण्डारा केवल एक स्थान पर ही नहीं चलता अपितु यह भण्डारा निम्न लिखित सेक्टरों पर भी चलता है:-

  • प्रथम सेक्टर – प्रशासन के सामने
    दूसरा सेक्टर – किला चौराहा
    तीसरा सेक्टर – बड़े हनुमान मंदिर के सामने
    चोथा सेक्टर – संगम के किनारे, इसके आलावा भी वर्ष में प्रमुख पर्वों पर विशाल भण्डारा किया जाता है।
  • महाशिवरात्रि
    गुरुपूर्णिमा
    गुरुदेव भगवान का अवतरण दिवस
    स्थापना दिवस

इन चार पर्वों पर विशाल भण्डारे का आयोजन होता है ।

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परमपूज्य गुरुदेव भगवान (प्रभु जी) की अमृत वाणी

 

यह संस्था हर संस्था से अलग है यहाँ पूजा नहीं सिखायी जाती यहाँ पर भक्ति सिखायी जाती है पूजा तो चोर, डकैत, दुष्ट व संत भी करते हैं लेकिन भक्ति केवल भक्त ही करते हैं भक्त कभी गलत रास्ता तय नहीं करते साथ ही साथ भक्त हर समय सत्कर्मों की तरफ अग्रसर होता है यह ॐ नमः शिवाय का बीज जो मै बो रहा हूँ इस वृक्ष को तैयार होने में 20 – 25 वर्ष का समय लगेगा लेकिन जब वृक्ष तैयार हो जायेगा तो फल बहुत ही मीठा होगा कारण कि इस ॐ नमः शिवाय शिव परिवार में छोटे – छोटे बालकों को समझाया जाता है कि भगवान की भक्ति करो । भगवान की भक्ति है क्या ? भगवान की भक्ति वह मार्ग है अगर सच्चे मन से कोई माता – पिता अपने बच्चे को भक्ति का मार्ग समझा दे तो कई जन्मों का पाप कट जायेगा तथा उसका पुत्र मरने के बाद भी अमर हो जायेगा। कारण कि जो भक्त है वो कभी मरता ही नहीं अमर हो जाता है बच्चों को क्या समझाना है ये माता – पिता को याद रखना चाहिये । ज्यादातर माता – पिता अपने बच्चे को बुद्धिमान बनाना चाहते हैं बच्चों को शिक्षा देते हैं कि पढ़ोगे नहीं तो करोगे क्या ? करोगे नहीं तो खाओगे क्या ? लेकिन मेरे विचार से गलत है, मेरे विचार से ज्ञानी बनो, बुद्धिमान नहीं, ज्ञान आ जायेगा तो समझ आ जायेगी कि जो ईश्वर माँ के गर्भ में 9 माह बच्चे को खिला सकता है, बच्चा पैदा होने के बाद दूध पिला सकता है, वही भगवान मुझे जीवन भर खिला सकता है ।

इसीलिए हर माता-पिता को अपने बालक को एक ही शिक्षा देना चाहिए कि अपने गुरु का ध्यान लगावें ज्ञान आ जायेगा, तो सोचना बंद कर देगा । जैसे- जैसे सोचना बंद कर देगा वैसे-वैसे समझना प्रारम्भ कर देगा और जैसे-जैसे समझना प्रारम्भ करेगा वैसे-वैसे भगवान या गुरु के ऊपर दिमाग लगाना बंद कर देगा, दिल लगाना प्रारम्भ कर देगा, जैसे ही भगवान व गुरु से दिल लग जायेगा उसको भगवान् का दर्शन हो जायेगा ।

सबसे पहले आपको भगवान की भक्ति प्रारम्भ करना होगा, जब आप भक्ति प्रारम्भ करेंगे तो आपका बेटा पूछेगा कि हे मम्मी, हे पापा, आप किसकी भक्ति कर रहे हैं तब आप बतायेंगे कि हे बेटा मै अपने भगवान की भक्ति कर रहा हूँ फिर आपका बेटा पूछेगा की भगवान कौन है ? तब आप उसको बतायेंगे कि भगवान भोलेनाथ जी हैं । बालक पूछेगा कि भोलेनाथ कौन हैं ? पापा इनकी भक्ति क्यों करते हो ? तो आप अपने बेटे को बतायेंगे बेटा इनकी भक्ति करने वाला कभी दुखी नहीं रहता, किसी प्रकार का संकट नहीं आता और वह बालक महान बन जाता है, इतना महान बन जाता है कि उसके सामने सारी दुनिया झुक जाती है । बालक कहता है कि पापा इनकी भक्ति ना करूँ तो क्या होगा ? तो आपको अपने बालक को बताना पड़ेगा कि बेटा तुमको जीवन में अपार कष्ट भोगना पड़ेगा, निर्धनता , अपमान का सामना करना पड़ेगा, तू कभी जीवन में सुखी नहीं रहेगा । ये बातें सुनने के बाद बालक पाप से डरेगा । वह अच्छा कार्य करके पुण्य कमायेगा जिससे परिवार का कल्याण हो जायेगा । यदि तुम इन बातों को घर-घर नहीं पहुंचाओगे तो उसके घर में गलत कार्य होगा ।

मेरे विचार को घर-घर पहुँचाना है यदि मेरे विचार को घर-घर नहीं पहुंचाओगे तो पाप के भागी बनोगे, क्योंकि जिस घर में मेरे विचार नहीं पहुंचेंगे तो उस घर में पिता शराब पियेगा । पिता को शराब पीता हुआ देख बच्चा पूछेगा कि पापा यह क्या पी रहे हो ? तो पिता झूठ नहीं बोल पायेगा । वो कहेगा कि मै शराब पी रहा हूँ । आपका बेटा फिर पूछेगा पापा शराब अच्छी चीज है पिता फिर बोलेगा नहीं बेटा बहुत बुरी चीज है इसे मत पीना । आपका बेटा फिर पूछेगा यदि बुरी चीज है तो आप क्यों पी रहे हैं । आप समझदार हैं इसीलिए तो पी रहे हैं और हमको नहीं पिला रहे हैं । मै जब जवान हो जाऊंगा तो मै भी पियूँगा आप थोड़ा पी रहे हैं मै इससे दोगुना पियूँगा । जब आपका बच्चा शराब पीना प्रारम्भ करेगा तो पूरे घर का सत्यानाश हो जायेगा इसीलिए अपने बच्चे के सामने हर समय अच्छे काम करिये जब अच्छे काम करेंगे तो आपका बच्चा अच्छे कार्य सीखेगा और आपके घर का कल्याण हो जायेगा ।

एक बात और कहूँगा इसको ध्यान से समझिये कुछ लोग जीव की हत्या करके उसके मांस को खाते हैं प्रत्येक जीव में भगवान का वास होता है आप जब अपने घर में मुर्गा, बकरा काटते हैं तो बालक आपसे पूछता है की पापा ये क्या काट रहे हैं ? तो आप कहेंगे की बेटा मैं मुर्गा-बकरा काट रहा हूँ तो आपका बालक पूछेगा कि पापा ये लाल-लाल क्या बह रहा है तब आप अपने बच्चे को बतायेंगे की ये खून बह रहा है तो बालक आपसे पूछेगा कि हे पापा आपको इन प्राणियो को काटने में, खून बहाने में मजा आता है तब आप चुप हो जाते हैं क्योकि आपके पास इसका कोई उत्तर नहीं रह जाता । तब आपका बेटा कहेगा की पापा आप अपनी जवानी में मुर्गे का खून बहा रहे हैं मैं अपनी जवानी में आदमी का खून बहाऊंगा । आपको अपनी गलती का अहसास होगा यदि आप अपने बच्चे को सेवा की भावना, ॐ नमः शिवाय महामंत्र, दया, प्रेम, भक्ति सिखायेंगे तो आपका घर सत्यानाश होने से बच जायेगा । हर चीज से आप सम्पन्न हो जायेंगे ।

गुरुदेव भगवान के मुख से..

मृत्यु लोक का कोई भी प्राणी गुरुदेव भगवान की 5 मणि को अपने जीवन में उतार ले तो वह देवतुल्य हो जायेगा:-

  • 1. त्याग :- क्रोध त्याग, नशा त्याग, लालच त्याग, मद और मोह त्याग दें ।
  • 2. तपस्या :- ‘जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है ’ अर्थात आराम छोड़ कुछ समय ईश्वर के लिए तप करें

कुछ देर के लिए अन्न को त्यागें और गुरु व भगवान के ध्यान में लगें, यही तपस्या है ।“ जो जितना कठिन तपस्या करता है वह मणि की तरह चमकने लगता है ”

  • 3. दया :- ह्रदय में प्राणियों के प्रति दया करो, सब में ईश्वर का स्वरुप देखो । अपने }kjk जाने- अनजाने में किसी को कष्ट न दो जीवन मणि की तरह चमकने लगेगा ।
  • 4. प्रेम :- प्रेम सबसे बड़ी जीवन की उपलब्धी होती है सबसे बड़ा ज्ञान होता है । सभी प्राणियों से प्रेम करें, कभी लड़ाई- झगडा न करें प्रेम की वाणी बोले । प्रेम से बड़ी कोई चीज नहीं । ये जीवन में मणि की तरह उजाला कर देता है ।
  • 5. भक्ति :- भगवान से बड़ी भक्ति गुरु की होनी चाहिए ।

    गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काको लागूं पायं।
    बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताय ||

    पहले तुम गुरु की भक्ति करो गुरु तुम्हे ईश्वर की भक्ति बता देगा गुरु तुझे ईश्वर से मिला देगा व भवसागर से पार लगा देगा । ये पांच मणि हैं जिसके शरीर में ये पांचो मणियां होती हैं, वह अँधरे में भी चमकता रहता है ।

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Om Namah Shivay – Har Har Mahadev – Jay Gurudev Bhagwan ..

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